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चीनी फ्री प्रोडक्ट सेहत के लिए कितने अच्छे हैं?

 शुगर फ्री कितना अच्छा है, कितना नुकसान पहुंचा सकता हैं।😐

SUGAR FREE के नाम पर धोखा!:100 ग्राम मिठाई में 0.5 ग्राम से कम चीनी ही SUGAR FREE , जानिए...कंपनियों के झूठ कितना परोसती हैं।




शुगर मरीजों की डाइट चार्ट 


देश में रक्षा बंधन के साथ त्योहारी सीजन शुरू हो गया है। हर साल रक्षा बंधन से लेकर नए साल तक पूरा देश अलग-अलग त्योहारों के साथ जश्न मनाता है और इसका सबसे जरूरी हिस्सा होता है…मुंह मीठा कराना। लेकिन पोस्ट कोविड दौर में जब लोगों को सेहत की चिंता पहले से ज्यादा है तो मीठे पर कंट्रोल करना भी जरूरी हो गया है। सेहत की यही चिंता LOW SUGAR और SUGAR FREE मिठाइयों का बड़ा बाजार तैयार करती है।


शुगर कितनी लेनी चाहिए?

भारत में फूड प्रोडक्ट्स का बाजार करीब 60 हजार करोड़ का है और इसमें शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 500 करोड़ से ज्यादा की है। यह हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। SUGAR FREE के साथ ही LOW SUGAR या NO ADDED SUGAR ऐसे लेबल हैं जो सेहत की फिक्र करने वाले मिष्ठान प्रेमियों के बीच खासे लोकप्रिय है

 अगर आप सिर्फ यह लेबल्स देखकर यह मान लेते हैं कि यह मिठाइयां या प्रोडक्ट्स आपका कैलोरी लेवल नहीं बढ़ाएंगी या शुगर को नियंत्रित रखेंगी तो संभल जाइए। पैकेज्ड उत्पादों के सिर्फ लेबल ही नहीं उन पर दिए गए NUTRITIONAL INFORMATION को भी ध्यान से देखिए।


अमेरिका के पर्ड्यू यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक, डाइट सोडा से मोटापा, डायबिटीज और हार्ट संबंधित बीमारियां हो सकती हैं. जो लोग वजन कम करने के लिए डाइट सोडा और ड्रिंक्स का सेवन करते हैं, उन चीनी मुक्त ड्रिंक में चीनी दूसरे फॉर्म में रहती है और वह पतला करने के बजाय वजन बढ़ा सकती है और उनके कई नुकसान भी हो सकती हैं.10 मार्च 2022भरतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI कहता है कि LOW SUGAR का क्लेम वही प्रोडक्ट कर सकते हैं जिनमें प्रति 100 ग्राम वजन में शुगर की मात्रा 5 ग्राम से कम हो। SUGAR FREE होने के लिए प्रति 100 ग्राम वजन में शुगर की मात्रा 0.5 ग्राम से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। जानिए, कैसे कंपनियां इन नियमों का उल्लंघन करती हैं और इन मानकों के पालन के लिए शुगर के जो विकल्प इस्तेमाल होते हैं वो सेहत पर क्या असर डालते हैं।😊


भविष्य प्लानिंग कैसे करें


आप कैसे रिटायर होना चाहेंगे *

शेयर बाजार में निवेश करने और अधिकतम उपज प्राप्त करने के कई तरीके हैं।

अपने अप्रत्याशित स्वभाव के कारण स्टॉक केवल युवा और साहसी के लिए माना जाता है। यह अनुशंसा की जाती है कि बुजुर्ग इस जोखिम भरी संपत्ति में निवेश करने से बचें। एक आम गलत धारणा को दूर करने के लिए, युवा और बूढ़े सभी निवेशकों के लिए स्टॉक आवश्यक हैं, क्योंकि वे एकमात्र ऐसी संपत्ति हैं जो लंबी अवधि में मुद्रास्फीति को मात दे सकते हैं।


प्रारंभिक सेवानिवृत्ति एक यात्रा है जिसके लिए जीवन में बहुत सारी प्रतिबद्धताओं और अनुशासन की आवश्यकता होती है। 20 के दशक में कई वयस्कों के लिए, अपने करियर की शुरुआत में सेवानिवृत्त होना एक सपना है। किसी को अपने वर्तमान और भविष्य के खर्चों का प्रबंधन करके एक सेवानिवृत्ति योजना बनानी होगी।



शेयर बाजार सबसे अच्छा निवेश साधन है, जो मुद्रास्फीति को अच्छे मार्जिन से हरा सकता है, और लोगों को अमीर बनाने का इतिहास है, जो अपने निवेश में सुसंगत हैं। शेयर बाजार के बेंचमार्क निफ्टी 50 पर नजर डालें तो पिछले 20 सालों में इसने 14% से ज्यादा सीएजीआर दिया है।


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शेयर बाजार में निवेश करने और अधिकतम उपज प्राप्त करने के कई तरीके हैं, जैसे प्रत्यक्ष इक्विटी खरीद, ईटीएफ और म्यूचुअल फंड।


प्रत्यक्ष इक्विटी


आप जितना अधिक समय तक गुणवत्तापूर्ण निवेश पर टिके रहेंगे, उतना ही अधिक प्रतिफल चक्रवृद्धि और धन में वृद्धि होगी। ज्यादातर निवेशकों के लिए, इक्विटी लंबी अवधि में ही अच्छा काम करती है। सेवानिवृत्ति के लिए बचत एक और दीर्घकालिक लक्ष्य है। लंबी अवधि की विकास जरूरतों को पूरा करने के लिए इक्विटी से बेहतर कोई अन्य साधन नहीं है। उदाहरण के लिए, एक इक्विटी फंड सालाना आधार पर लगभग 13-15% का रिटर्न दे सकता है।


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ईटीएफ


ईटीएफ, या एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, शेयरों के समान कारोबार किया जा सकता है और पैसे को स्थानांतरित करने में अधिक लचीलापन प्रदान करता है। उस ट्रेडिंग में अधिक जोखिम होता है, लेकिन यह एक जानकार निवेशक के लिए फायदेमंद हो सकता है। अपनी अनूठी संरचना के कारण, फंड कर-कुशल भी हैं। इन निवेशों में, फंड मैनेजर रिटर्न में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाते हैं, इसलिए ये उत्पाद प्रत्यक्ष निवेश की तुलना में बहुत अधिक लागत प्रभावी और कम जोखिम वाले होते हैं।


म्यूचुअल फंड्स


विभिन्न प्रकार के वित्तीय लक्ष्यों के लिए धन संचय करने के लिए म्युचुअल फंड एक लोकप्रिय परिसंपत्ति वर्ग बन गए हैं। म्यूचुअल फंड सबसे अनुकूलनीय वित्तीय साधनों में से हैं। आपकी आय बढ़ने पर वे आपको अपना निवेश बढ़ाने और आवश्यकतानुसार धन निकालने की अनुमति देते हैं। इनका प्रबंधन पेशेवरों द्वारा किया जाता है। इसलिए, वे आम तौर पर प्रत्यक्ष निवेश और ईटीएफ से बेहतर रिटर्न देते हैं, लेकिन लागत तुलनात्मक रूप से बहुत अधिक है।


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निष्कर्ष


एक स्मार्ट विकल्प मायने रखता है क्योंकि यदि आप एक शांतिपूर्ण सेवानिवृत्त जीवन जीना चाहते हैं, तो आपको न केवल सही समय बल्कि सही प्रकार के निवेश की भी आवश्यकता है। सीमित समय और कम जोखिम सहनशीलता के कारण, सेवानिवृत्ति के करीब आने वाले व्यक्ति को उन कंपनियों में निवेश करना चाहिए जो लगातार बढ़ती हैं और गुणवत्ता प्रबंधन रखती हैं।


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ऑनलाइन क्लास फायदे और नुकसान

ऑनलाइन क्लास के फायदे और नुकसान


आज का युग है डिजिटल हैं, समय की मांग है कि 
हम सभी को आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल आना चाहिए। 
सभी को कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप ,टेब स्मार्टफोन आदि का इस्तेमाल करना आना ही चाहिए । भारत देश ने सब से पहले गणना शुरुआत की थी, यही के खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने इस का अविष्कार किया था। भारत ने शून्य व दशमलव दुनियां को दिया, १९ सदी से ही कम्पूयटर का प्रयोग होने लगा था।

इक्कसवीं सदी में प्रवेश करने वाले बच्चे पहले से ही एस्माट हैं, भारत में मोबाइल का इस्तेमाल बहुत बड़ी जनंख्या करती है। यहां के बच्चे जन्म से ही तकनीक व स्मार्टफोन सीख कर आ रहे हैं।

हम जिस विषय की बात कर रहे है, वह ऑनलाइन क्लास की है। हम जिस रहस्यमयी बीमारी के कारण घरों में बन्द है, करोना नामक बीमारी ने हमें असाहय कर दिया। जिससे उभरने के लिए कुछ तो करना ही होगा।

इस पीढ़ी को यह पहली बार, ऐसी आपदा से जूझना पड़ रहा है। बच्चों का पड़ाई का सेसन अप्रैल से शुरू हो जाता है। एक से डेढ़ महीने की पढ़ाई हो चुकी होती है, आपदा के कारण हमें बच्चों की शिक्षा को ऑनलाइन क्लास  की शुरुआत करनी पड़ी है। जिस से विद्यार्थियों की पढ़ाई का नुक़सान न हो, उनका सिलेबस पीछे न हो ओर बच्चों को भी घर में ही पढ़ाई करने का मौका मिल गया है ।

ऑनलाइन क्लास बहुत बढ़िया तकनीक है ,आने वाले समय में इसी तरह की शिक्षा प्राप्त की जा सकती हैं। हम इसके लिए बहुत अच्छी तरह से तैयार नहीं है ,यह तकनीक सब के पास उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी सरकार कुछ कर के विदयार्थियों को सामग्री पहुंचा रही है , इस के लिए शिक्षा मंत्रालय ने अपना एक ऐप उपलब्ध कराया है। जिसेसे सब को शिक्षा की सारी सामग्री पहुंचा जा सके।
सभी स्कूलों को सूचना दी गई है कि स्कूल ऑनलाइन क्लास ले, ऑनलाइन क्लास स्कूल शुरू कर चुके हैं।

ऑनलाइन समस्या


कुछ स्कूल तो अच्छी तरह से करवा पा रहे है मगर कुछ स्कूलों बहुत दिक्कत हो रही है, उनके पास वाईफाई उपलब्ध नहीं है , किसी के पास लैपटॉप,कंप्यूटर ओर स्मार्टफोन नहीं है। अधिकतर सरकारी स्कूलों में ये परेशानी हो रही है।
जो स्कूल करवा रहे हैं ,वह भी दो या तीन ही विषय ही पढ़ा रहे हैं। बच्चो को कुछ समझ आ रहा है, तो कुछ नहीं समझ आ रहा है, कही वाईफाई स्पीड कम होने के कारण वीडियो डाउनलोड करने में दिक्कत आ रही है।
गरीब वर्ग के पास वाईफाई उपलब्ध नहीं है, निम्न मध्यम वर्ग के लिए भी इतना सारा डाटा लेना मुश्किल है। जो प्रायमरी व मीडिल स्कूलों के बच्चों को पढ़ना मुश्किल हो रहा है कि वह लैपटॉप या मोबाइल पर अपना पूरा ध्यान नहीं दे रहे हैं। बच्चों के आंखो को भी नुक़सान दे रहा है,
ओर उनका ध्यान खेलने में चला जा रहा है।
शिक्षकों के लिए भी ये अनुभव नया है, शिक्षकों को भी ऑनलाइन क्लास लेने में दिक्कत हो रही है, कुछ बच्चे ऑनलाइन क्लास अटेंड नहीं करते हैं तो कुछ उनके साथ शरारत है।
एक नया मामला देखने को मिला है कि महिला शिक्षकों को अश्लील मैसेज भेज रहे हैं,भद्दे कमेंट कर रहे हैं ।इस समस्या पर भी संज्ञान लिया गया है।

डिजिटल की ओर अग्रसर


इस नये युग में हम आगे बढ़ ते रहना चाहिए, वरना हम पीछे रह जायेगे, दुनियां आगे निकल जाएगी। हमें आगे की ओर देखना चाहिए, कठिनाइयां आती है,उसे पार करते रहना चाहिए। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक का ही इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसलिए अब कठिनाई को दूर कर ऑनलाइन क्लास चलते रहना होगा।
वैसे भी कॉम्पटेटिव परीक्षा ऑनलाइन तो होने लगी है, निजी कोचिंग संस्थान ऑनलाइन क्लास लेते हैं,तो सरकारी स्कूलों ओर अन्य संस्थाओं को भी ऑनलाइन क्लास लेते रहना चाहिए।
इतनी बड़ी आपदा मै अपने बच्चों की सुरक्षा पहले होनी चाहिए,वह देश के भविष्य है। 

निष्कर्ष

ज्ञान कही से भी प्राप्त हो, जहां से मिले वही से ज्ञान का प्रकाश वहां से लें लेना चाहिए।

  •  ऑनलाइन क्लास काफी समय की बचत होती है, अगर नेट कि स्पीड अच्छी हो , स्कूलों की जगह ऑनलाइन क्लास नहीं ले सकती। बच्चों के सेहत का ख्याल रखना ही होगा